सर पर हाथ रखा
By Purnima Raj
ऐसा गुलजार वाक्य देखी ना थी
आंखें तो देखी अंतरात्मा ने भी महसूस किया
कोई छोटी, बड़ी, अनोखी बात नहीं
उन्होंने बस मेरे सर पर हाथ रख दिया ।
मेरे घर के बगल से ही एक बच्चे का
मेडिकल कॉलेज में दाखिला हुआ
पर मेरा कुछ नंबरों से नहीं हुआ
फिर भी उन्होंने मुझ पर विश्वास किया
क्या बताऊं मैं अंदर से टूट गई थी
अब मेरा क्या अधूरे रास्ते पर खड़ी हूं
अब क्या रास्ते के लिए लड़ूं
या खामोश होकर चल पड़ूं क्या बताऊं
उन्होंने इस बात का इजहार ही ना किया
ये कैसा चमत्कार हुआ ऐसा वाक्य देखी ना थी
आंखें तो देखी अंतरात्मा ने भी महसूस किया
कोई छोटी, बड़ी, अनोखी बात नहीं
उन्होंने बस मेरे सर पर हाथ रख दिया
मैं अपने मन से दूसरा काम शुरू कर ली
इसका इजहार अब तक ना कि
झूठ कभी ना बोली उनसे
सच बोलने की कोशिश ना की
लगा सफर की सफलता उनसे बोलेगी
वो बहुत लंबे समय तक अब तक ना आई
मैं सही हूं, या गलत हूं
आज तक कभी पूछा ही नहीं
ऐसा वाक्य आज तक मेरा देखा ही नहीं है
मैं हर बात पर हां करने वाली बेटी हूं
चाहे बात छोटी, हो बड़ी, हो अनोखी हो
उनकी आंखें भी देखेगी
उनका अंतरात्मा भी महसूस करेगा
पर फिर भी मुझे चमत्कार
माफी मिलने पर और
मेरी बुने गए रास्ते पर विश्वास है
फिर वो मेरे सर पर हाथ रखेंगे
बस बुने गए रास्ते का इजहार करेंगे।
By Purnima Raj

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