समुन्दर
By Shobhit Gupta
कमल नयन देख हुई यह भ्रांति ।
नैनों में है प्रेम समुन्दर ।
बिछोह पीर बिन समझ न पाते ।
यह भेद अति सुंदर ।
ईश्वर ने यूँ रची यह माया ।
सागर में दर्शन देती अपनी ही छाया ।
प्रतिबिंब देख जिसका हमें प्रिय लगा समुन्दर ।
उस प्रचंड प्रेम ज्वाला का स्त्रोत था स्व ह्रदय के अंदर ।
By Shobhit Gupta

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