सबसे सुरक्षित चुनाव
By Purnima Raj
आज दिखाना है, बताना है ,
बहुत बारीकी से समझाना है
आज कोई बात हुई
शुरुआत का अंत नहीं हुआ
एक लड़की को अनोखे
तरीके से चोट दी गई
वो कोलकाता में रहती थी
मेडिकल कॉलेज में पढ़ती थी
डॉक्टर बनने वाली थी
किसी अनजाने को क्या की थी
वो चीखी तो उनके
मुंह से खून बहाया
उनका चश्मा तोड़ा
आंखों से खून बहाया
आधे कपड़े फाड़ दिए
पूरे शरीर में चोट पहुंचाया
उसकी हवस पूरी हो गई
उसके बाद उनका
गल्ला दवाकर मार दिया ।
ये बात समाज में आई फिर क्या हुआ
वो शब्द फिर से आने लगे
हमारे गलियारों में
अकेले मत जाना
क्या रुक जाऊं या चलते बनू
या फिर से शुरुआत कर दूं
पीछे मुड़-मुड़ कर देखने का
अगल, बगल, आगे, पीछे
बस चौकना रहने का
काम मेरा है करना हमको है
हार जीत मुकाबला
यही सोच है हमारी
समाज में अपन पहचान बना पाऊं
ये सपना है हमारा
सुबह की नौकरी है पर
रात को कभी-कभी जाना पड़ता है
ठहरकर सोची रुकूं या चलूं
या सत्ता में सबसे ऊपर
पहचान बना लूं , चुनना सही था
सबसे सुरक्षित चुनाव लगा मुझे
सत्ता में सबसे ऊपर पहचान बना लूं।
By Purnima Raj

Comments