सब को सब कुछ नहीं मिलता।
By Akansha Ashok
मिलने को तो मेहनत से सब मिलता है,
लेकिन सब को सब कुछ नहीं मिलता।
बिकने को तो बाज़ार में सब बिक सकता है,
लेकिन प्यार नहीं बिकता।
किसी को सब मिलता है तो परिवार नहीं मिलता,
किसी को परिवार मिलता है तो घर नहीं मिलता।
ढूंढने को तो ढूंढने से सब मिलता है,
लेकिन भगवान नहीं मिलता।
कर्म करने से फल मिलता है,
पाप करने पर दण्ड मिलता है।
ऐसे तो सब को दण्ड नहीं मिलता?
लिखने को तो सब लिखते हैं,
पर मिर्ज़ा ग़ालिब की तरह कोई लिख नहीं सकता।
इस दुनिया में सीखने को तो बहुत कुछ मिलता है,
लेकिन सब को सब कुछ सीखने को नहीं मिलता,
चाहकर भी...
सब को सब कुछ नहीं मिलता।
By Akansha Ashok

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