सफर महादेव तक…………..
Updated: Sep 21, 2022
By Vishal Chaudhary
संकट चहुँओर, थी घनघोर घड़ी
तारेगा कौन ? बात हर ओर अड़ी
जन मन जीवन पर ग्रहण लगा
मृत्यु वैतरणी के, उस छोर खड़ी !!
तिल तिल कर, जीव जो जलने लगे
देव-असुर सब हाथ, तब मलने लगे
छोड़ अमृत मोह पीछे हटने लगे
सब सपने थे, काग़ज़ से गलने लगे !!
कालकूट से अब कौन प्राण बचाएगा ?
इस कालरूपी से, कोई नरत्राण जिताएगा
सबके अहंकार-दंभों का मोहभंग हुआ
या इस दुष्कर क्षण, ब्रह्माण्ड हो अप्राण जाएगा ?
पर इक देव, स्थिर सा वहीं खड़ा,
शांत चित्त, पर्वत सा रहा वहीं अड़ा
जटाजूट भस्मांग मृगचर्म धारी,
विश्व दुख भंजन, क्या यहीं खड़ा ?
प्याला हाथ ले, जग कष्ट हरने चला
सब लगे सोचने, ये क्या करने चला
धधकते काल को प्याले में भरने लगा
तूफ़ानों में फँसे, प्राणों को तरने चला !!
चक्षुओं से, अश्रु धाराएँ बहने लगी
हर जिव्हा, जय उद्घोष कहने लगी
समस्त हलाहल धर लिया कण्ठ में
भगवती शक्ति, शिव में रहने लगी !!
परमार्थ की, सब व्याखाएँ मिटने लगी
बेड़ियाँ, व्यथाओं की जो कटने लगी
कण कण मृत्यु हर मृत्युंजय बने
की आत्मा-आत्मा, महादेव रटने लगी !!
By Vishal Chaudhary

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