सफ़र भी मैं हूँ, हमसफ़र भी मैं हूँ
By Astha Priyadarshini
सफ़र-ए-हमसफ़र भी मैं हूँ,
सफ़र भी मैं हूँ।
जो चलना चाहूँ,
तो डगर भी मैं हूँ,
हसीन इसं ज़िंदगी का,
दीदार भी मैं हूँ।
दर्द-ए-राह की मंज़िल भी मैं हूँ,
राह-ए-ज़िंदगी की असलियत भी मैं हूँ,
कारवाँ भी मैं हूँ,
और राहों की राह भी मैं हूँ,
सफ़र भी मैं हूँ, हमसफ़र भी मैं हूँ।
मैं चाहूँ तो चलूँ,
चाहूँ तो रुख़-ए-हवा का मोड़ दूँ,
चल पड़ूँ तो दूर तक जाऊँ,
चोटियों की माप जान लूँ ,
सफ़र भी मैं हूँ, हमसफ़र भी मैं हूँ,
सफ़रभीमैंहूँ, हमसफ़रभीमैंहूँ।
By Astha Priyadarshini

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