सफ़र अपने आप तक
By Sonu Khan
दिल को था बदले का जुनून,
हर चोट पे बस एक ही सुकून —
कि किसी तरह दर्द का हिसाब किया जाए,
जो सहा है, वो वापस दिया जाए।
पर मन कहता रहा हर बार,
रुक जा, ये रास्ता है बेकार।
बदला ज़ख्म को और गहरा करता है,
दिल को अंदर से ख़ाली करता है।
सोचा, अब मैं ये आग जलाऊँ क्यों?
जो चला गया, उसके लिए खुद को सताऊँ क्यों?
जो छोड़ गया, उससे अब कैसा हिसाब?
खुद को खो कर क्या मिलेगा इसका जवाब?
ग़ुस्सा छोड़ दिया, रास्ता मोड़ लिया,
कर लिया एक नई मंज़िल का इरादा है।
अब हर दर्द मुझे राह दिखाता है
और हर ठोकर मुझे खुद से मिलवाता है।
मैं गिर भी गया तो सँभल जाऊँगा,
हर दिन खुद को बेहतर बनाऊँगा,
जो टूटा है, उसी को ताक़त बनाऊँगा,
खुद की आवाज़ से दुनिया को समझाऊँगा।
By Sonu Khan

Comments