सपनों की ख्वाइशें ||
By Dr. Amit Tanajirao Suryawanshi
सपनों की ख्वाइशों को हकीकतों की सजा मंजूर नहीं, तुझे तो दरिया मे खुद तूफान बनकर उतरना है. अगर कोई सपना जिद से बडा होता, तो इंसान अब तक खुदहि से हारा होता.
शक तो मुश्किलों को उन्हीं के नसिबों पर है शायद, वरना उंचे पहाडों को हौसलों से हैराणीयां क्यों होती. हिम्मत बनाए रख इस कदर के आंधियों के सीने में भी खौफ हो तेरा, मजबूर करदे सोचने पर उन्हें भी, पता नहीं किस सरफिरे से पाला पड़ा है |
By Dr. Amit Tanajirao Suryawanshi

Comments