सत्ता
Updated: Jul 15, 2025
By Aanya Kapur
सियासत के दाव पेंच कुछ ऐसे होते हैं
सत्ता की होड़ में सब अंधे होते हैं ,
पलटता है वक्त का पासा जब
कुछ राजा होते हैं, कुछ रंक होते हैं।
आँख बंद करके कुछ नहीं कहना चाहिए
क्या पता कब दुनिया बदल जाए,
सत्ता की दौड़ में अंधा नहीं होना चाहिए
क्या पता कब तख्ता पलट जाए।
राजा तो अनेक हुए
पर
अहंकार तो रावण का भी टूटा था,
थम जाओ अभी
नहीं तो सोचोगे,
मेरा भाग्य भी फूटा था।
परमार्थ त्याग कर
केवल मैं-मैं करते हो,
राजा छोड़ो
अपने-आप को मनुष्य कैसे कहते हो?
मन मलीन होगा तो
आभूषण पहनने पर भी
राजा न दिख पाओगे
रक्त- पात तो करोगे
किंतु
रक्षण ना कर पाओगे।
इतिहास की रक्त रंजित स्याही में
यदि प्रेम का पुष्प खिलाओगे
सदियों तक
कलिंग के अशोक कलाओगे,
तुम्हारे चरित्र से सुगंध
आई तो
वर्षों तक पूजे जाओगे,
छवि न छोड़ पाए
ज़माने पर
तो कोई दूजे ही कहलाओगे।
नारा यदि तुम्हारा नारा ही बनकर रह गया
निर्णय नहीं
अभिनय ही कर पाओगे,
आँखें तो होंगी
पर
देख नहीं पाओगे।
By Aanya Kapur

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