सच्चा प्यार
By Paras Minhas
इतना रोया वो उस रात अपने में कि सोच भी नही सकता वो अपने सपने में।
वो कहता है वो भी रोया था, तो ये किसी और को अपना बनाने का ख़्याल भी कैसे उसने अपने दिल में बोया था।
वो कहता है जिंदगी भर वो सिर्फ तुम्हारे साथ है, तो ये स्टेटस में उसके हाथों में किसका हाथ है।
कहता वो तुम्हे सिर्फ तुम्हारा है, फिर ये दिल उसका क्यों हर किसी के पीछे आवारा है।
चलो फिर भी समझा लिया तुमने ख़ुद को कि छोड़ो अब उसकी जिंदगी उसकी हुई और हम नही तो कोई और बन्दगी उसकी हुई।
मगर ये क्या अभी कुछ दुर चले ही थे, जिंदगी से दोबारा मिले ही थे,
सपने कुछ और सिले ही थे,
कि मानो फिर से वापिस आने की चाह में उधेड़ दिए वो सपने सारे उसने जो अभी फुरसत में तुमने बुने ही थे।
कहता वो बदल गया है, गलतियों का एहसास है उसे,
चलो मान लिया पर किसी और से जीने की क्यों थी आस उसे।
फिर भी माफ् किया तुमने , बस इसे इतेफाक किआ तुमने, कुछ गलत नही, कुछ गलत नही,
क्योंकि तुम्हारा प्यार सच्चा था, हर इक कतरा जो भी बचा लगा दिया तुमने, बस उसे माफ़ किया तुमने।
फिर भी तुम्हारी जिंदगी को न एहमियत दी उसने, बस जीता गया तो बस अपनी जिंदगी को , और पिलाते गए कड़वे घूंट तुम अपनी जिंदगी को।
यूँ घूट-घूट कर जी रहे हो तुम, और अपनी जिंदगी में उन्हें तो बस अपने सपनो के महलों से मतलब है।
गलती की थी जिसने एहसास भी होना जरूरी है,
पहल की थी पहली बार भी उसने तो आखिरी दम तक निभाना भी जरूरी है, ज़िमेदार भी वही है और जिम्मेदारी का हकदार भी वही।
शर्ते मंजूर हैं उसे, तो तुम्हारा हकदार भी वही है और सच्चा प्यार भी वही।
वरना आशिकों की भीड़ लगी पड़ी है सड़कों पे साहब और अगर ऐसा एकतरफा प्यार प्यार है, तो मत जायां करो जिंदगी को अपनी यूँ ही।
क्या पता ये कल को किसी और के हाथ बिक जाए।
By Paras Minhas

Comments