सच्चा प्यार
By Rathod Aakash
सच्चा प्यार
थोडासा लेकीन सच्चा रहा ए प्यार
दो दिनो को बड़ा अच्छा रहा
और हमने नहीं हमारे, सच्चाई ने कोशीश
की ईसलिए प्यार तो न मिला,
मगर प्यार का ए सफर अच्छा रहा
और कोई न गिला, यही आंखरी फेसला के हुंवा कुछ दिनों का दौर मगर कुछ दिनो का ए दौर अच्छा रहा
कोशीश तो की मगर कुछ रेखाए थी
रीती-रीवाजोकी, सिमाए थी
और हमं घुलते तुझमे मगर
कुछ ना, घुलने की भी वजाए थी
में समझ सकता हूं, और वो भी समजदार हैं
में बढा सकता हूं कदम अपनी मंजील की ओर,
और उसकी भी मंजील कोई और हैं
भुलाया नहीं जा सकता, उसे भी पता है
के एक शक्स कितना शिद्दत से चाहता है
और क्या करेगी वो भी खुदको कठोर करके
फैसला लेना हैं
अब आगे का सफर अकेले ही होगा
और यादो को ही संग लेके चलना हैं..!
By Rathod Aakash

Comments