सच कहो
Updated: Jul 18, 2025
By Kshitij Kawatra

पहले जो सच है उसे सच कहो
मज़हब और ख़ुदा को अलग-अलग कहो
ये दर अल्लाह का, वो दिन है शिवा का
ऐसे यज़्दाँ को ना हमा-वक़्त कहो
ये मुमकिन है हमे ख़ुदा की ज़रूरत हो
पर एक गुमराह हुजूम, मज़हब की ज़रूरत कहो
गर ख़ुदा का पैग़ाम अम्न ही है तो
जंग, मज़हब की ना-क़ाबिलियत कहो
कल जो गुनाह थे, आज वो हक़ हैं
ऐसे क़ानून को ना मर्ज़ी-ए-रब कहो
जो हो सकता है वहीं हो रहा है
इसमें शैतान की ना कोई हराफ़त कहो
जन्नत का सुकून हो या दोज़ख़ का जुनून
मुस्तक़बिल जो भी हो आज हक़ को हक़ कहो
By Kshitij Kawatra

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