संज्ञान
- Hashtag Kalakar
- Oct 15, 2025
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By Navneet Gill (नवनीत गिल)
शब्द बेज़ुबां,
कह जायें सभी कुछ,
मगर "जुबां",
उनके आगे लगी तुच्छ।
पढ़ "संसार",
आसानी से समझता,
किन्तु बिसार,
दे, बातें जब है उलझता।
रत्तीभर फर्क,
पड़े नहीं, देख जगत,
"तर्क-वितर्क",
करे बन हरदम सशक्त।
भांति, अक्षर,
काश लेता "संज्ञान",
बिना फिर डर,
सुखी बसता हर इंसान।
By Navneet Gill (नवनीत गिल)

Awesome poem