संघर्ष से सफलता तक
By Khushbu Vandawat
तपते वन में तपकर देख,
सूरज-सा जलकर देख,
बनना है अगर हीरा, तो अंगारों पर चलकर देख।
अभिमान से नहीं, सम्मान से चल,
हवा-सा नहीं, तूफ़ान-सा चल,
कुछ करना है अगर, तो डरकर नहीं — डटकर चल।
पी ले आज ज़हर की घूँट,
कल शहद नसीब में होगा,
रख भरोसा खुद पर, वक़्त एक दिन तेरा होगा।
एक पल नहीं, तेरा पूरा वक़्त बदलेगा,
सूरज-सा तेरा नाम चमकेगा,
मेहनत कर खुद पर, मुक़द्दर भी तेरा झुकेगा।
कुछ बनना है तो रास्ते हज़ार हैं,
काँटों में ही खिलते गुलाब हैं,
लड़ खुद से, क्योंकि आने वाला हर पल ख़ास है।
तेरी हर मुस्कान के पीछे एक राज होना चाहिए,
तेरा हर क़दम लाजवाब होना चाहिए,
तुझे अपना लक्ष्य साफ़ पता होना चाहिए।
By Khushbu Vandawat

Amazing poem
Good poem
Goof
Nice
very motivating