संघर्ष के सफ़र
By Rohit 'Lukad' Jain
लोग जब तक भीग न जाएँ, बरसात को नहीं मानते,
और जब तक खुद पर न बीते, जज़्बात को नहीं मानते,
ठोकरें जब तक न लगे, रास्ते आसान नहीं लगते,
संघर्ष जब तक अपना न हो, सपनों के मायने नहीं बनते ।।
हर मुस्कान के पीछे छुपे अरमान, आँसू नहीं बनते,
जो चुपचाप बहते हैं, वो पानी झील नहीं बनते,
जीत वही पाते हैं जो थक कर भी हैं चलते,
जो डर को हराते हैं, वही तो असली बाज़ीगर बनते ।।
कहानी सबकी है, पर हकीकत कितने बनते,
हर चेहरा मुस्कुराता रहे, ऐसी महफिलें कहाँ बनते,
जीवन की धूप-छाँव में जो अपने आप में चमकते,
वही तो हैं असली हीरे, जो हर तूफ़ान में भी निखर जाते ।।
By Rohit 'Lukad' Jain

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