श्रींकृष्ण का संदेश
By Dr. Priyanka Priyam
आओ चले, एक कदम सुख, शांति, अवचेतन से चेतन मन की ओर,
फिर वही दिन आया है जब मैं इस पावन धरा पर जन्म लिया,
कंस था एक दुष्ट ऐसा, जो कल मरकर भी...
आज हर इंसान की तृष्णा बन लौट आता है,
साफ़, सुंदर,मंदिर सा तन, अब मलिन हो आया है,
आओ चले, एक कदम सुख, शांति, अवचेतन से चेतन मन की ओर,
सोच ताड़का की बन, आज हर मन को वसीभूत कर जहरीला झूठ पिलाया है ,
भाई-भाई है खून के प्यासे, आज एक बलराम-कृष्ण जरूरी है,
सखा की पहचान बन, सुदामा को हर्षित कर, अर्जुन को अलौकिक किया,
आओ चले, एक कदम सुख, शांति, अवचेतन से चेतन मन की ओर,
द्रोपदी की लज्जा बचा, लाक्षागृह की भेदन से कुरुक्षेत्र के छेदन तक,
कर्ण को अधिकार से,शकुनी- दुर्योधन की मृत्यु के प्राप्ति तक,
कण-कण को क्षण-क्षण में समाहित कर, हर दुख और संताप मिटाने,
श्रीमद् भागवत का ज्ञान लाया हूं,
आओ चले, एक कदम सुख, शांति, अवचेतन से चेतन मन की ओर,
माता देवकी से यशोदा तक, अंधकार से प्रकाश तक का सफर,
असत्य से सत्य तक, जन्म से मोक्ष तक, सफर में हमसफर बन,
पाप की गठरी खोल, पुण्य संग्रह कर, मुरली मधुर की तान छेड़,
राधा-कृष्ण,राम-सिया संग आऊंगा मैं तुझको लेने,
आओ चले, एक कदम सुख, शांति, अवचेतन से चेतन मन की ओर...
By Dr. Priyanka Priyam

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