शोर (Shor)
Updated: Jan 20, 2024
By Ankita Sah
शांत है अब पटाखों का शोर थोड़ा, कुछ बत्तियां अब भी जल रही हैं,
कुछ घरों की खिड़कियों पे, वो रंग बिरंगी तितलियों सी दिख रही हैं ।
उस रंग बिरंगी रोशनी को आसमान में फूटते हुए देखा तो था मैंने भी बहुत चाव से,
जो झिलमिल कर फिर धुंए में बदल गयी थी,
धुआं अब दिख तो नहीं रहा ज्यादा, पर क्यूँ घुटन सी हो रही है ?
रंग और रौशनी तो अब भी पसंद हैं मुझे,
इंतज़ार करती थी इस दिवाली की रात का कितनी बेसब्री से,
फिर क्यूँ आज ज्यादा खुशी नहीं हो रही है?
शायद इस शोर में सब दबता जा रहा है ।
कैसा है ये शोर आखिर ?
उन्माद का.. या जज्बात का ..?
कोई समझ नहीं पा रहा इसे, ये बढ़ता क्यूँ जा रहा है?
क्या इंसान अब भी इंसान है...या कुछ और होता जा रहा है ?
By Ankita Sah

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