शिवोहम शिवोहम ध्यानकर…….
Updated: Sep 21, 2022
By Vishal Chaudhary
ब्रह्माण्ड को सँभालकर, भागीरथी को धारकर
विषभुजंग कण्ठ सँवारकर, दसों दिशाएँ जानकर
ललाट सोम बाँधकर, चिरकाल कल्प जागकर
समस्त धरा जप रही, शिवोहम शिवोहम ध्यानकर !!
सर्वज्ञ आँख मूँदकर, त्रिकाल सार जानकर
भस्म से शृंगारकर, रूपों से विश्व मोहकर
शक्ति अर्धांग मानकर, भवानी शंकर कल्याणकर
समस्त धरा जप रही, शिवोहम शिवोहम ध्यानकर !!
मृत्यु का वेग मोड़कर, सृजन से जीव तारकर
अमृत को जग में सींचकर, महारूद्र ताण्डव नाचकर
शिव विश्वरूप धारकर, मोक्षदायी ज्ञान संचारकर
समस्त धरा जप रही, शिवोहम शिवोहम ध्यानकर !!
पंचभूत योग जानकर, हैं मुण्ड माला तानकर
अधर्म का विनाशकर, प्रचण्ड त्रिशूल थामकर
ब्रह्माण्ड हाथ जोड़कर, नतमस्तक महादेव मानकर
समस्त धरा जप रही, शिवोहम शिवोहम ध्यानकर !!
By Vishal Chaudhary

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