शिव - मेरे आधार
- Hashtag Kalakar
- Dec 3, 2025
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By Swati Kumari
वो शून्य है,वो पूर्ण भी ,
वो आदि भी,वो अंत भी,
महादेव कोइ मूर्ति नहीं,
वो चेतना है मुझमें बसी हुई।
मैं शब्द हु वो अर्थ है,
मै नर्म हु,वो सख़्त है,
मेरे मन में छुपे सवालों का ,
शिव ही सारे प्रत्यार्थ हैं।
वह त्याग-तपस्या की मूरत से ,
मैं विचलित-अस्थिर धारा सी,
मेरे चंचल मन को राह दिया ,
अपनी अनुशासन की छाया में।
अब स्वयं को तुझ में समा रही ,
मेरा संपूर्ण है तेरी हाथों में ,
अब जीत भी तेरी काया है ,
और हर भी तेरी माया है।
जिस पल नाम लिया शिव का ,
हर पीड़ा ने शीश झुका लिया,
जब गिरी में संसार की गोद में,
तब शिव ने मुझको थाम लिया।
अब जीवन मरण का भय नहीं ,
यह ब्रह्मांड तेरी ही माया है,
मेरे जीवन का हर एक अध्याय,
लिखा है शिव की हाथों ने।
शिव मेरे हैं, मैं हूं शिव की,
वो आराध्या मेरे,मैं पुत्री उनकी,
मेरे धड़कन की एक रूप में ,
मेरे जीवन का आधार है शिव।
By Swati Kumari

Good thought
It's really nice 💯 poem
🤩🤩
बहुत ही सुन्दर रचना 👍👍👍👍 हर हर महादेव!!!!!🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
बहुत ही सुंदर और हृदयस्पर्शी कविता के माध्यम से प्रभु की स्तुति 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏