शिल्पकार
By Parul Bhargava
शायद ,
हम दोनों का सम्बन्ध
वक़्त की आँच में तपकर
अभी और भी परिपक्व होना है
तब कहीं संभव होगा
हमारा मिलन इस सृष्टि में
साक्षी बनेंगे हम-तुम
इस गूढ़ प्रेम के अध्याय के
जीवंत कर देंगे
अतीत के स्वर्णिम पृष्ठ
बन बैठेंगे वर्तमान के शिल्पकार
जब कल्पनाएँ होंगी साकार
भविष्य के भय से
स्वंय की चेष्टाओं को
बाँधेंगे नहीं,मुक्त ही रखेंगे
और.....
आत्मिक मिलन के कुछ
अविस्मरणीय क्षणों को सहेज लेंगे
अपने हृदय की अँजुरी में
चिरपर्यन्त....
अपने श्वासों की अंतिम ध्वनि तक ....!!
By Parul Bhargava

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