शायरी
Updated: Oct 3, 2024
By Amarjeet Kumar
मत रखों दिल पर पत्थर मेरे नाम की
कल तक सोती थी रख दिल पर तक्कये मेरे नाम की
कैसे भुला पाओगी उस दिन और रात की
जो कभी बात किया करती थी सुहागरात की । ।
शौक नहीं दर्द से भरा हालात किसी को सुनाऊँ
मगर दर्द बहुत भरा है दिल के अंदर कैसे छिपाऊँ
नहीं चाहते हुए भी दर्द दे जाती हैं ये जालिम दुनिया
आप ही बताइए अब और दर्द कहाँ और कैसे छिपाऊँ।।
उसने जो याद में बुलाया अपने आशिक को
तो मैं दौड़ते सामने चला आया उस दिवानी को
नहीं मालूम कि वह हमें बुलाया या किसी ओर को
मुझे सिर्फ इतना मालूम हैकि जरूरत है हमारे जैसे
आशिक को ।
By Amarjeet Kumar

Comments