शायद अलविदा कहना इतना भी मुश्किल नहीं।
By Siddharth Surana
पहली मुलाकात से पुछो ''कितने हसीन थे वो पल'' अब आखिर वो वक्त आ गया है जब आँखों के परे सब हो जाएगा ओझल, शायद अलविदा कहना इतना भी आसन नहीं| उस पेड़ की डाली से पुछो जिसने उस आखिरी पत्ती को थामे रखा है, या उस तारे को पुछो, जिसको इस खूबसूरत आसमान ने संजोए रखा है, शायद अलविदा कहना इतना आसान नहीं|
जहां आना हुआ करता था हर रोज़ अब वहा से गुज़रने पर भी महज़ गुज़रना ही पड़ेगा कभी सोचा नहीं था की इन गलियो से अपना रुख मोड़ना पड़ेगा, शायद अलविदा कहना इतना आसान नहीं| शायद फिरसे उन लफ्जो को सुनने के लिए तरसेंगी ये दिवारें या क्या पता गूँज उठे चारों और खामोशी और सन्नाटे शायद अलविदा कहना इतना भी आसान नहीं| माना अब हमारे दरमियाँ दूरियां जगह ले लेंगी,
मुलाकातों को अब इंतज़ार करना पड़ेगा पर यादों का ये सिलसिला कभी थमेगा नहीं,
इसलिए कुछ यादों को दफ़्न कर रहा हूँ यहीं,
शायद अलविदा कहना इतना भी मुश्किल नहीं।
By Siddharth Surana

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