| वो मेरा घर है |
Updated: Jul 14, 2025
By Kavita Batra
वो मेरा घर है,
जहाँ मैं जैसी हूँ, रहती हूँ,
ना कुछ और होने का डर है,
वो मेरा घर है ।
मेरे लफ्जों में ज़िक्र है उसका ,
क्योंकि वो मेरा महफूज़ दर है,
जहाँ नहीं है मुझे कोई बंदिश और ना किसी बात की फिक्र है,
वो मेरा घर है।
ना रखते हैं वहाँ किसी गैर का आना जाना ,
क्योंकि नहीं है वो कोई सड़क या बाज़ार, वो मेरे सजदों का दर है,
बस एक , वो मेरा घर है ।
By Kavita Batra

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