वो बचपन
By Suryam Mittal
खो सा गया है वो बचपन,
खो सी गई है वो मासूमियत।
ना थी किसी बात की फिक्र,
ना था किसी बात का डर.
सीधा सरल था जीवन,
खो गया है वो बचपन।
ना था ये दौड़ना भागना,
ना था ये रोना रुलाना.
आज भी मुसकुराता हूँ याद करके वो दिन,
आज भी सुकून मिलता है याद करके वो दिन,
जब था बचपना और बचपन.
जितने थे रिश्ते थे दिल से सब,
ना थी किसी से कोई जलन.
ना होती थी किसी से अनबन ना कोई तकरार,
रहते थे सब साथ और एक दूसरे के लिए बेकरार।
ना थी खाने की चिंता ना सोने की फिक्र और ना था कोई ग़म,
बस थे हमारे खिलोने और हम,
खो सा गया है वो बचपन।
By Suryam Mittal

Bachpan it's good subject other than usual love
Bachpan ki yaad aa gai isse padh kar