वो बंजारन
By Aseem Ahmed Abbasee
ढूँढ रहे हो किस बस्ती में उसका पता ठिकाना जी,
वो बंजारन कब ठहरी है? उसको चलते जाना जी,
कंकड़ पत्थर उसकी दौलत, मिट्टी उसका ज़ेवर जी,
तारे उसकी जेब के सिक्के, उसका क्या लुट जाना जी?
उसकी आँखों में सपनों के, सात समन्दर रक्खे हैं,
उसके पैरों के नीचे है, मीलों का वीराना जी,
उसको आता देख के शाखें, पत्तों को झमकाती हैं,
रस्ते के सब पेड़ों से है, उसका मेल पुराना जी,
नदी के दोनों साहिल उसके, दर्रे परबत उसके जी,
उसकी गठरी में रक्खा है, खेत का दाना दाना जी,
चिड़िया, तोते, मोर, टिटहरी सब उसके दीवाने हैं,
जिसने बोली प्रेम की बोली, उसका हुआ ज़माना जी,
बात अगर निकली है यारों, उसकी बात भी छेड़ो फिर,
उसकी बात में सच्चाई है, बाक़ी बात फ़साना जी.
By Aseem Ahmed Abbasee

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