वो आखिरी लोह
By Suryam Mittal
मेरे हाथों में सिगरेट देख,
उसने मुझे एक कसम दिलायी,
फिर दिक्कतें चाहे कितनी भी आई,
वो लोह मैंने दुबारा ना जलायी,
उसके साथ की ख़ुशी में,
अपनी सारी तनहाई छुपाई,
आज फिर एक अरसे बाद उसकी याद आयी,
किसी और के साथ वो मुझे नज़र भी आई,
तनहाई के आलम में डूबा,
उसकी बातों में उलझा,
जेब में राखी वो आखिरी सिगरेट फिर जलायी,
होंठों पे लगने से पहले फिर वो कसम याद आयी,
ना जाने क्यू वो चली गई,
पर प्यार थोड़ी गया है,
ये बात सोच कर वो लोह फिर बुझाई,
उसने तो नहीं पर मैंने अपनी कसम बखूबी निभाई..
By Suryam Mittal

Infamous subject but beautifully written
Good rhyme
Juggerlary of words are good