विश्राम का दिन
Updated: Feb 2, 2024
By Dr. P. L. Bharati
मिला नही मुझे विश्राम का दिन
बिना सवालों के जवाब का दिन
पथिकों सा चलते चलते
सोचा था आराम का दिन
मिला नही मुझे ……
आदतें, हसरतें और फरमाईशें
मिलती रही मुझे हर दिन
सबकी ख्वाहिशों को पूरा करते
रह गया वो आराम का दिन
हर एक रिश्ता निभाते निभाते
चला गया शुकून का दिन
मिला नही मुझे ……
मेहनत से एक महल बनाया
सुंदरता से उसे सजाया
देख महल सब मिल गये
मानो उपवन खिल गये
चार दीवारी के अंदर भी
मिला नही वो चैन का नींद
लाचार, बेबस, उलझनों से
भरा रहा मेरा हर दिन
मिला नही मुझे ……
सुख शांति पाने को मै
चला गया महफिल महफिल
देख महफिलों की उलझन
मन मेरा हो गया विचलित
हैरान, परेशान रहा
मेरा हर रात और दिन
भागते और भटकने का दिन
मिला नही मुझे ……
और अंत मे थककर बैठा
चौराहे पर रूक कर देखा
साहस और हिम्मत से मैंने
मन मे धैर्य बनाये रखा
संतुष्टि जब आ जाये तो
मिलता है जवाब का दिन
शांति और संतोष का दिन
मिल गया वो आराम का दिन
मुझे मिला विश्राम का दिन
By Dr. P. L. Bharati

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