विशुद्ध प्रेम
By Prerna Arora
उसने मुझे
तोहफे में दी पायल
पैरों का श्रृंगार
छमछम, छमछम
पूछा मुझसे
पसंद आई तुमको
जवाब के बदले
मैंने किया सवाल
पायल ही क्यों ?
स्त्री के तो अनेकों आभूषण है
जो उसके श्रृंगार को
कई गुना बढ़ा देते हैं
फिर पायल ही क्यों??
वह कुछ ना बोला
2 मिनट की खामोशी रही हमारे बीच
फिर अपने उदास आंखों को
मेरी आंखों से मिलाकर बोला
अभी तक मेरा प्रेम निवेदन
तुमने स्वीकार कहां किया....
इसीलिए इतने ही
श्रृंगार का अधिकारी हूं मैं
प्रेम और पूजा दोनों में
फर्क नहीं मेरे लिए
आह !!!!
कितना निश्चल
कितना निर्मल
कितना शुद्ध
होता है सच्चा प्रेम
By Prerna Arora

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