विभीषण
By om pal singh
असरुवासि नी लं का का माहौल बड़ा ही भीषण था। राम नाम का जाप करेलं केश का भाई वि भीषण था। लकिेकिन रावण नेभी इसका कभी नहीं प्रति कार कि या। आँख कान सब बं द कि ए थेमौन रहा स्वीकार कि या। बोल वि भीषण तनू ेक्यों फि र राजद्रोह येकर डाला। एक लात केबदलेही बस तनू ेबदल लि या पाला। राष्ट्र की खाति र जान गँवाना पहला धर्म बताया था। मझु ेबता देआज वि भीषण नि यम कहाँ सेलाया था। दुश्मन सेमि ल तनू ेखलु कर खबू करी गद्दारी थी। राजा की कुर्सी पानेको येतरेी मक्कारी थी।
भाई भतीजेपौतेतक भी तरेेसामनेकटतेथ।े फि र भी तरेेसांस हमशे ा राम राम ही रटतेथ।े राम प्रभूहैंअटल सत्य हैसाथ हमशे ा रहतेह।ैं देश धर्म और भाई केसं ग मि टनेको वो कहतेह।ैं तझु सेबहेतर कंुभकर्ण था सच्ची बात बताता था। महाबली था भारी भरकम वो शास्त्रों का ज्ञाता था। सीता हरण ही मौत वरण हैसच्ची बात बताई थी। फि र भी उसनेभाई केहि त यद्ु ध मेंजान गँवाई थी। पाप कर्म मेंडूबेरावण तक को ज्ञान बता डाला। सीता माता को देवी राघव भगवान बता डाला। लकिेकिन रावण जि द्दी था भाई को कायर बोल दि या। कुम्भकर्ण नेखदु को जाकर मौत तलु ा पर तोल दि या। लकिेकिन तूतो एक लात मेंदुश्मन जसै ा झलू गया। सारी उम्र रहा लं का मेंक्षण भर मेंसब भूल गया। अरेमर्खू र्खक्या बड़ेभाई की लात नहीं सह सकता था। राज सखु ों को छोड़छाड़ तूवन मेंभी रह सकता था। राम तरेेआदर्श ही थेएक भीख उन्हीं सेलेलते ा। पि तृवचन पर वन वन घूमेंसीख उन्हीं सेलेलते ा।
ज्यष्ठे पत्रु थेश्रीराम नपृ बननेकी तयै ारी थी। पि तृवचन ना टूट जाए गद्दी को ठोकर मारी थी। लकिेकिन तूतो भाई केबदलेदुश्मन साझा बन बठै ा। राजा केजीवि त रहतेतूखदु ही राजा बन बठै ा। रावण केसं ग सब असरुों को कर्मों नेहरवाया था। सच पछू ो तो रावण को बस तमु नेही मरवाया था। अब तरेेमस्तक सेयेकलं क नहीं हट पायगे ा। जो भाई सेघात करगे ा वि भीषण कहलाएगा। तझु को सं ज्ञा भी अब काली सेकाली दी जाएगी। घर का भदे ी लं का ढावेयेगाली दी जाएगी। ओमपाल सिं ह "वि कट"।
धौलाना,हापड़ु,उत्तरप्रदेश।
By om pal singh

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