विद्रोही मन
By Alka Singh
बातें सपनों की माने ना,
मुझको भी तो पहचाने ना,
बेबसी की बात जाने ना,
विलाप करे, चीत्कार करे ।
टूटे दिल की वो माने ना,
साँसे गहरी पहचाने ना,
मजबूरी को वो जाने ना
विलाप करे, चीत्कार करे।
बहती आंखों को देखे ना,
सूखे गालों को पहचाने ना,
सूजी आंखों को जाने ना,
विलाप करे, चीत्कार करे।
विनती मेरी वो देखे ना,
उद्गारो को पहचाने ना,
कातर पुकार को जाने ना,
विलाप करे, चीत्कार करे,
ये मेरा विद्रोही मन,
ये मेरा विद्रोही तन|
By Alka Singh

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