विचारों का मेल
By Jagrati Chaurasiya
मुफ़्लिसी सी हैं विचारों में आजकल लोगों के,
आख़िर उसमें मिल्कियत के तो हर किसी के इरादे हैं।
कुछ सोचते हैं कि उनके हाथ में सबकुछ,
उनको कहां ख़बर की वो तो सिर्फ़ प्यादे हैं।
डोर तो हाथ में उसके जो तय कर रहा सबकुछ,
क्या आज हैं और क्या कल रहेगा आपके सितारों में।
वो तो चलते हैं ऊपर वाले के इशारे पर,
जिसकी मुठ्ठी में बंद हैं ये सब खेल।
सब होगा बेहतरीन गर हो सकेगा,
उसके विचारों से हमारे विचारों का मेल।
By Jagrati Chaurasiya

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