वात्सल्य गीत
Updated: Jul 24, 2025
By Kushagra Singh

वात्सल्य गीत का राजा हूँ वात्सल्य गीत दोहराता हूँ
तान मधुर बंसी कान्हा की उस मधुर गीत को गाता हूँ
सामान्य सरल हूँ जनमानस मे फिरभी अमित अनन्य कहलाता हूँ
पराजय नहीं अटल मेरी मैं सदा विवश हों जाता हूँ
मेरी जीत नहीं अंकित है मैं पराजित ही चर्चा मे आता हूँ
वात्सल्य गीत का राजा हूँ वात्सल्य गीत
महाकाल का भक्त लाडला, महाकाव्य सी रचना हूँ
मधुमास का मधुर महीना, उस मधुर काल की रचना हूँ
कथाकार हूँ कलमगार भी मैं कथा अश्रु की गाता हूँ
सम्मिश्रण से पटी धरा को धरा बोझ दिखलाता हूँ
उपहार नहीं पाए मैंने , मैं संघर्ष भेट चढाता हूँ
ईमान नहीं बेचा मैंने, मै कलम नहीं झुकाता हूँ
व्याल नहीं देखे मैंने, मैं गरल हज़म कर जाता हूँ
चक्र सुदर्शन मैं केशव का, डमरू मै डमरू वादक का
लडना जिसने न जाना फिरभी लडने जाता हूँ
मेरी जीत नहीं अंकित है मैं पराजित ही चर्चा मे आता हूँ
वात्सल्य गीत का राजा हूँ वात्सल्य गीत
तान मधुर बंसी कान्हा की उस मधुर गीत को गाता हूँ
By Kushagra Singh

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