वजूद की पहचान
By Rashmi Ray
मत दो तुम ज़वाब हमें इन सवालों में रहने दो।
ना कराओ हक़ीक़त से रूबरू, हमें इन ख़्यालों में रहने दो।
ना दिखाओ हमें सच का आइना, हमें इन झूठे अफ़सानो में रहने दो।
चाहो तो तोड़ दो सपने हमारे, पर हमें ज़िन्दा इन फ़सानो में रहने दो।
ना कराओ हमें सूरज से रूबरू, हमें तनहा इन चाँद तारों में रहने दो।
ना समझाओ हमें मोहब्बत की रस्में, हमें ख़ुश हमारी चाहत में रहने दो।
चाहे ना कराओ हमारे वजूद की पहचान, हमें बदनाम ही इन घरानो में रहने दो।
बेशक कुछ नाम ना दो रिश्ते को, पर गुमनाम ही हमें ख़यालों में रहने दो।
अब मत दो तुम जवाब हमें, उलझे हुए इन सवालों में रहने दो।
By Rashmi Ray

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