वक्त ये गुजरता गया
Updated: Jul 18, 2025
By Mudit Shukla
वक्त ये गुजरता गया,
फासला ये दर्मियां बढ़ता गया।
वो इस रिश्ते से मुकरता गया,
और उसके दिल से मैं उतरता गया।
उसका हर तसव्वुर मेरा दिल कुतरता गया,
के दिल पे एक घाव बस उभरता गया।
ऐसा लगा जैसे नब्जो में जहर था गया,
और मानो मेरा जीवन बस ठहरता गया।
मुझसे दूर होकर वो निखरता गया,
और उससे दूर रहकर में बिखरता गया।
अकेलापन से मैं खुद ही लड़ता गया,
उसे पाने का ख्वाब भी धीरे - धीरे मरता गया।
वो जाते वक्त भी एक अरमान मन में गढ़ता गया,
और मै अपनी श्यारी मै उसका जिक्र करता गया।
By Mudit Shukla

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