“वक्त आगे निकल गया”
By Renu singh
वही बूंदो की रंगत, वही पहले सी घटाऐ,,,
देखकर मन आज फिर मचल गया,,, लगता है कुछ यूं,,,
हम वही है और वक्त आगे निकल गया।।।।
चल निकले भीनी फुहारो के साथ, रोक न पाए कदमों को,,
छू के निकली ठंडी हवा, भीगे भीगे आंचल को, बूंदो की छमछम में
मन मयुर सा मचल गया...
हम वही है और वक्त आगे निकल गया।।
जाने क्यो दिल बार बार उसी आंगन के मे बरसते पानी की यादो मे दौड जाता है,
जहा अल्हड सा वक्त अठखेलियों मे गुजरा करता...
देखके ड्योढी पे बूंदो बांकपन
फिर आंखो वो मंजर संवल गया....
हम वही है वक्त आगे निकल गया।।
बादलो की गडगडागहट, बिजली का कौंध जाना, हवा के संग चलती तेज बारिश मे,
पानी से भीगे दुपट्टे को हाथो मे थमाना, बूंदो के इस बारात मे आज वो किस्सा फिर झिलमिल हो गया....
हम वही है और वक्त आगे निकल गया।।
By Renu singh

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