लड़खड़ाते क़दमों को
By Abhishek Choudhary
लड़खड़ाते क़दमों को संभाल जरा सा
रात का नशा सबब कुछ हो न जाए
अधखुली नज़रें कहीं टकराएं ना फिर
उस निगाह-ए-नाज़ पे तूँ खो न जाए।
चश्म का दर्पण ख्वाब दिखला देता है
ध्यान रख आशिक तेरा यह सो ना जाए
शख्स चला जाता है राज अगर खुल जाए
बांध रख उसको छुड़ा फिर वो न जाए।
By Abhishek Choudhary

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