लड़कियाँ
By Rashmi Abhay
खुल कर हँसती हुई लड़कियाँ
तुम्हें अच्छी नहीं लगेंगी
तुम नहीं सह पाओगे इनका हँसना
क्योंकि तुमनें बंद कर रखा है
अपनी सोच के उस कपाट को
जहाँ हंसती खिलखिलाती लड़कियाँ
सभ्य नज़र नहीं आती..
सुनो
तुम मनुष्य बनने के क्रम में
पाषाण बन चुके हो।
एक दिन विरासत में दिये गये
तुम्हारे तमाम बन्धन
ये मुस्कुराने भर के एक ख्याल से
तोड़ देंगी...
और इनकी हर हँसी
तुम्हारे तथाकथित सभ्य समाज को
वास्तविक सभ्य समाज की ओर ले जायेंगी
By Rashmi Abhay

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