लोहित
By Monica Banerjee
नदी शांत है
अभूतपूर्व सौंदर्य लिए हुए
भावुक है
तभी तो कल्पनाशील है
अथाह है
गतिमान है
फिर भी उदासीन है
सिमटी हुयी
शायद सकुचायी हुयी
दीर्घ साँस लेती हुयी
नदी, तुम मुस्कुराओ
देखो, तुम्हारे चहुँ ओर
दूब है, फूल हैं, वृक्ष हैं
सोंधी ख़ुशबू वाली मिट्टी है
चहचाते पक्षी हैं
चमकता सूरज है
झूमते बच्चे हैं
अंदर के कलरव से उभर आओ
अपने समीप शैशव से भरे
कोलाहल को समेट लाओ
By Monica Banerjee

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