लोग दिमागों से जब लड़ने लगते हैं
Updated: Jan 25, 2024
By Tanya Singh
लोग दिमाग़ों से जब लड़ने लगते हैं
दिल से सारे रिश्ते बिगड़ने लगते हैं
समझा नहीं पाते हैं जो बातें अपनी
इसलिए शायद वो सब लड़ने लगते हैं
ज़ख़्म हरे पौधे होते हैं पानी दो
ये पौधे बिन पानी सड़ने लगते हैं
ऐब निकल आते हैं रिश्तों में जैसे
मीठे फलों में कीड़े पड़ने लगते हैं
काँटे घड़ी के वक़्त बताते हैं लेकिन
एक समय ये कांटे गड़ने लगते हैं
हम वो हैं जो आँखों में आँसू आते ही
अक्सर अपनी आँखें रगड़ने लगते हैं
By Tanya Singh

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