लोग कहते हैं कि वो बड़ी हो गई है,
By Neha Srivastava
“बेफिक्र हँसी उसकी कहीं खो गई है,
लोग कहते हैं कि वो बड़ी हो गई है,
तोल-मोल कर शब्दों को कहने लगी है,
चुप-चुप सी वो रहने लगी है,
ख़्वाबों को दिल की तिजोरियों में बंद करने लगी है,
ज़रूरतों को भी छुपाने लगी है,
सुनसान गलियों से आती-जाती नहीं है,
नक़ाबों से चेहरा ढाँकने लगी है,
ओढ़नी उसकी लहराती नहीं है,
वो काँधे पर दुपट्टा सँभालने लगी है,
अपनी पसंद-नापसंद बताती नहीं है,
जाने कैसे कहना वो सबका मानने लगी है,
बात-बात पर अब वो रूठती नहीं है,
हर बात के लिए कसूरवार खुद को ही ठहराने लगी है,
पंख उसके लोगों की आंखों में खटकने लगे हैं,
इसलिए छोड़ कर आसमां वह धरती पर किसी गुमनाम कोने में आशियां बनाने लगी है,
हाँ,शायद सच ही कहते हैं लोग,
मेरी लाडो, सचमुच बड़ी हो गई है।“
By Neha Srivastava

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