लिबास
Updated: Jul 18, 2025
By Dr. Devendra K Prajapati
एक लिबास में कितने लिबास देखें हैं,
कपड़ों की आहट में कितने कयास देखें हैं,
कुछ पहने, कुछ धोने, कुछ स्त्री करने के लिए,
तुम्हे लगता है,
इतने ठीक है,
मैंने तो अलमारी भरने के भी शौख देखें हैं।
हटा दो सारे निशां दाग के, लिबास से,
कोई देखे लिबास तो हिसाब ना लगे।
देखो तो शालीनता से लिबास की परत,
उसकी कताई, उसकी बुनाई, उसकी पाक की सपत,
एक ही परत से बात हो लिबास की,
परतों को ज़मीर की कोई बात न लगे।
तुम्हें मालूम है लिबास के धागे की बुनाई,
जानता हूं, खरीद लोगे लंबी सी लिबास,
खयाल रखना जिंदगी का लिबास ओछा ना लगे।
By Dr. Devendra K Prajapati

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