लिखकर मैंने दिन बिता दिये, लिखकर मैंने रात
- Hashtag Kalakar
- Jan 22, 2025
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By Pooja Singh
लिखकर मैंने दिन बिता दिए
लिखकर मैंने रात,
लिख लिखकर सदियां बिता दी
फिर भी लिखना न आया रास।
एक दिन ख़ुद से सवाल कर बैठी
जो लिखा वो हासिल क्यों नहीं और जो हासिल हुआ वो लिखा क्यों नहीं?
दूर कहीं से एक आवाज़ आई और कहने लगी-
कहने को तो तू लिखती है,पर लिखती बेपरवाह क्यों नहीं?
संभल संभल कर तेरे हाथ चले, टटोल टटोल कर तू जज़्बात लिखे
और कहती लिखना तुझे अब रास नहीं।
लिखना है तो सच लिख
और बगावत कर
ये जो अल्फाजों के पिंजरे में बंद
तेरे जज़्बात है उन्हें आज़ाद कर
तू लिख अपनी हार को,
पूरा कर उन सभी अधूरे किस्सों को
तू लिख अपनी शर्मिंदिगियों को,
और हंसने दे उन चार लोगों को
तू अपने जैसा छोड़
और लिख अपने आप को
तू अपने जैसा छोड़
.
.
.
“तू लिख अपने आप को।“
By Pooja Singh

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