लिख दूँ
By Vikas Rajoriya
आज मन कर रहा है की कुछ शायरी लिख दूँ , दर्द था दिल का जो वो वाक्या दो बारी लिख दूँ |
यादे हसीन आँखे नमकीन आज पहली मुलाक़ात की वो कहानी सुहानी लिख दूँ ||
हाँ पता है बहुत कुछ कहना है तुमने , तुम्हारी आज सारी परेशानी लिख दूँ
भूल जाऊ वो लम्हे जो तुम्हारे बिना काटे , आज सब भूल कर ख़ामोशी मुहँ जुबानी लिख दूँ
जिस पर मर मिटा वो तेरी सादगी, आज अपनी आशिकी पुरानी लिख दूँ
कुछ तेरे कुछ मेरे वादे तेरे शिकवे तेरे गिले तेरी बाते सुहानी लिख दूँ
कौन करेगा याद मुझे जाने के बाद, तो सोचा आज अपनी इमानदारी पर बेईमानी लिख दूँ
नाम बहुत है तेरा जहाँ में, आज अपने नाम के आगे गुमनामी लिख दूँ
एक टीस उठी थी जब दिल, में वो रात आज रूहानी लिख दूँ
शिकायते अपनी नाराजगी, मेरी आज तेरी सारी मनमानी लिख दूँ
आज मन कर रहा है की कुछ शायरी लिख दूँ , दर्द था दिल का जो वो वाक्या दो बारी लिख दूँ
यादे हसीन आँखे नमकीन आज पहली मुलाक़ात की वो कहानी सुहानी लिख दूँ
By Vikas Rajoriya

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