लापता है कहीं...
By Himani Bhardwaj
मुबारक तुझे ये हार मेरी
दुआओं ने रंग दिखाया है तेरी
चटक कर रह गया शीशे सा दिल मेरा
ख़ामोशी में थी वो शय तेरी
उदासी में जा बैठा है कहीं
न कहता -न सुनता है मेरी
जो दिल तुझे दिया था कभी
अब धड़कनो संग लापता है कहीं
By Himani Bhardwaj

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