लफ्जो का कारोबार
By Sachin Madhukar Gote
जो है मतलब वो मतलब की जात है।
जो आए कोई जवाब तो खालिस हो।
बात जबां से करो तो सहारा दिल का लो..
या खामोश रहो की बेहतर मतलब हो।
हर दिल का अपना बाजार है।
मोहलत मिले तो दाम अपने मुताबिक हो।
ना समझो लफ्जो का कारोबार..
तो जबां को दायरा तोड़ने दो।
जहा कलम तक अपनी रूह ना पहुंचे..
तो बेशक सफों पर कत्लेआम छोड़ दो।
By Sachin Madhukar Gote

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