लफ़्ज़ों की औक़ात
By Manan Chowdhry
इन लफ़्ज़ों की औक़ात पे शक है मुझे,
बातें तो बड़ी बड़ी कर जाते है, और चन्द अक्षरों में ही सम्मा जाते है सभी|
बेपरवा सनम के कानो में अनसुने हो जाते है,
और उससी सनम की ज़ुबान से ज़हर पीके निकले, तो भुलाए नहीं भुलाते है कभी|
वकीलों की आवाज़ों में, दलील मालूम पड़ते है,
और कोई मुफ़्ती जारी करदे इन्हें, तो हुक्म बन जाते है तभी|
दोस्तों की गालियों में दोस्ती का सबूत बन जाते है,
और दुश्मनों की तारीफ़ में दुश्मनी तमाम कर जाते है कभी|
अक़्लमंदो की जमात में हिकमत हो जाते है,
नालायकों के जश्न में शोर बन जाते है सभी|
वालिदों की बातों में नसीहतें बन के छुप जाते है,
और ज़माने की नसीहतों में, ताने बनके चुभते है कभी|
मोहब्बत भरे इन ग़ुब्बारों का पिटारा होता है माँ के पास,
और बाप के पिटारे वाले ग़ुब्बारों में, वो बात ही नहीं|
इन लफ़्ज़ों की औक़ात पे शक है मुझे,
बातें तो बड़ी बड़ी कर जाते है, पर चन्द अक्षरों में ही सम्मा जाते है सभी|
By Manan Chowdhry

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