रोटी की तलाश
Updated: Dec 2, 2022
By Shivali Bhardwaj
रास्ते से लेकर गली के हर कोने कोने तक घूमता हूं
हाथ फेलकर मैं अक्सर खाने की बीक्ख मांगता हूं
लोग निकल जाते है मुंह फेरकर मुझसे
मैं अपनी खाली हथेली देख अपनी किस्मत को रोता हूं
भरी बारिश में घुबारे हाथ में पकड़ कर
छोटे बच्चो की तलाश में रहता हूं
दस रुपए दस रुपए चिला चिला कर
मैं अपने हालातों को सुधारने की कोशिश करता हूं
कुछ फटकार लगा देते है तो कुछ मेरे हालातों
पे तरस खा जाते है
तो कभी सो जाते है खाली पेट ही तो कभी कोई
हमारे भर पेट खाने की वजह बन जाते है
अपनी उमर के बच्चे स्कूल जाते देख मैं अक्सर
चिंतित हो जाता हूं
मेरी किस्मत क्यों नही उन बच्चो जैसी
क्यों मैं सिर्फ खाने की तलाश में बटकता रहता हूं
मिटी पे सो जाना खाना मिले तो खाना
बस ऐसी जिंदगी जीता हूं
चेहरे पे मुस्कान लेकर मैं रोजी रोटी के लिए
रोज निकल पड़ता हूं
By Shivali Bhardwaj

Comments