रूह तेरी
By Abhishek Choudhary
रूह तेरी जैसे चांद–सितारे हैं
हम तो तेरे दीदार के मारे हैं
कोई गया हम पर बरसे तो
लुट जाएँ हम भी सारे हैं।
बहती नदी सी जुल्फें तेरी
ले डूबी हैं धड़कन मेरी
क्या करें दिल तुझपे अटका
बस तेरे प्यार के ही मारे हैं।
लग जा सीने से दिलजाना
आओ ये सांसें उलझाएं
इश्क में हर गम प्यार लुटाएं
तब जानो गम कितने प्यारे हैं।
जुल्फ़ की छाओं को तेरी मैं
अपना घर दहलीज बना लूं
तेरी धड़कन दिल में समा लूं
फिर हर शब तेरे ही सहारे हैं।
तुम ना हुए तो हम क्या करेंगे
फिर तो हम हरदम तड़पेंगे
बस यही इल्ज़ाम सताए
तेरे बिन हम तो बेजारे हैं।
आओ एक आशियाना बनाएं
घर को नए ख़्वाबों से सजाएं
तुम मेरी जिंदगानी बना दो
हमने कई अरमान संवारे हैं।
By Abhishek Choudhary

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