रिश्तों की नोक झोंक
Updated: Jul 25, 2025
By Apeksha Bhatia

बिखरे हुए रिश्तों का अलग ही स्वाद होता है,
उनको फिर से समेटने का अलग ही नशा होता है।
फिर से नयी शुरुआत करके, फिर से अजनबी से ख़ास बनके,
इस टेड़े मेढे सफर का अंदाज़ ही कुछ और होता है।
मीठी बातों के लिए तड़पने का अलग ही जूनून होता है,
इस लड़ाई वाले समय में अपनापन कुछ ज्यादा ही झलकता है।
कहने को मन मुटाव और नफ़रत से भरा रिश्ता हो गया है,
पर इन विवादों को सुलझाने का अजीब ही शौक चढ़ गया है।
सपनों की इस गली में फिर से घूमने का मौका हर किसी को थोड़ी मिलता है,
इन पलों को जीने के लिए भी एक जिगर का टुकड़ा होना जरूरी होता है।
By Apeksha Bhatia

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