रिश्तों का सौदा
- Hashtag Kalakar
- Dec 8, 2025
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By Rohit 'Lukad' Jain
नई रीतियाँ अपनाईं, पर दुनिया वही पुरानी,
इंसान बन गया खिलौना, दौलत ही अब कहानी,
इस मतलबी और स्वार्थ की अंधी दौड़ में,
मासूमियत की निशानी कहीं खो सी गई या हो गयी धुंधली ।।
झूठ के रंग में सजी है अब हर एक ज़ुबानी,
सच कहने की सज़ा भी जैसे कोई बलिदानी,
रिश्ते भी अब सौदों में ढलते हैं हर शाम,
जहाँ दिलों की जगह बस लेन-देन की रवानी ।।
खुशियों की तलाश में उलझा रहा कहीं आदमी,
पर अंदर से हर रूह पर छायी रही वीरानी,
चेहरे पे हँसी, दिल में एक ही शिकन रही,
ज़िन्दगी की भीड़ में रहा तन्हा और थी हर दम ख़ामोशी।।
By Rohit 'Lukad' Jain

Wow
Trueee liness
Well said